प्रकृति की गतिशीलता

जय श्री राम सुख एक मानसिक स्थिति है जब स्थितियां और संवेदना अनुकूल हो तो सुख की स्थिति महसूस होती है अनुभूति होती है स्थितियां और संवेदनाएं कभी एक सी नहीं रहती दूसरे शब्दों में सुख आने जाने वाला है आज जो अनुकूल है कल प्रतिकूल भी हो सकता है प्रकृति का नियम है गति इसलिए किसी भी प्रवाह को रोका नहीं  जा सकता प्रकृति का नियम है गति इसलिए किसी भी प्रवाह को रोका नहीं जा सकता जो ऐसा करने की कोशिश करता है वह कभी सुखी नहीं होता सुखी तो वही होता है जो स्वयं स्थिर है और जो जानता है इस सत्य को जो अपनी खुली आंखों से प्रकृति की गतिशीलता को देखता है यह परिवर्तन हुई तो प्रकृति का सौंदर्य है यही सुख है

Dr.u.kumar द्वारा प्रकाशित

Dr.uk BAMS M.D( drvygun)B.H.U

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